➤ गणतंत्र दिवस से पहले मंडी आगमन पर डीसी की गैर-मौजूदगी पर मंत्री ने जताई आपत्ति
➤ विधानसभा में नियम 75 के तहत विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज) नोटिस किया प्रस्तुत
➤ प्रशासनिक प्रोटोकॉल उल्लंघन को बताया संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़ा मामला
हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक प्रोटोकॉल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है।विक्रमादित्य सिंह के बाद नाराज़ हुए मंत्री यादवेंद्र गोमा ने अब डीसी मंडी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाया है। युवा सेवा एवं खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा ने डीसी मंडी अपूर्व देवगन (IAS) के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन नोटिस दायर किया है। मामला 25 जनवरी 2026 को मंडी पहुंचने के दौरान कथित रूप से प्रोटोकॉल उल्लंघन से जुड़ा है।
मंत्री के अनुसार, वे 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के लिए एक दिन पहले मंडी पहुंचे थे, लेकिन उनके आगमन पर डीसी मंडी न तो मौजूद थे और न ही उनकी अनुपस्थिति को लेकर कोई पूर्व सूचना दी गई। इसे मंत्री ने प्रशासनिक दायित्वों की गंभीर अनदेखी बताया है।
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि किसी भी जिले में राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम से पहले किसी कैबिनेट मंत्री के आगमन पर डीसी की मौजूदगी या अधिकृत प्रतिनिधि की व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है। मंत्री का कहना है कि यह केवल सामान्य चूक नहीं बल्कि विधानसभा के विशेषाधिकारों की अवहेलना के समान है।
मंत्री यादवेंद्र गोमा ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि इस नोटिस को औपचारिक रूप से स्वीकार कर डीसी मंडी से स्पष्टीकरण तलब किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। यह नोटिस विधानसभा कार्यविधि नियमावली के अध्याय XII, नियम 75 के तहत प्रस्तुत किया गया है।
इस घटनाक्रम को राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासन के बीच बढ़ते टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है। यदि विधानसभा अध्यक्ष इस नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो मामला आगे विशेषाधिकार समिति तक भी जा सकता है।
फिलहाल इस मुद्दे पर डीसी मंडी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले समय में यह मामला प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक कार्यशैली पर असर डाल सकता है।



